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🖼️ प्रथम चित्र प्रमाण — पद्म पुराण में गौ माता और गौ सेवा की महिमा
📜 पद्म पुराण में

गौ माता और गौ सेवा की महिमा

गौ की सेवा, स्पर्श और परिक्रमा करने से
समस्त यज्ञों और तीर्थों के समान पुण्य फल
प्राप्त होता है !

पद्म पुराण के अनुसार, गौ माता समस्त सुखों और मंगलों की जननी हैं। उनकी सेवा करने से समस्त देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पद्म पुराण में गौ माता और गौ सेवा की महिमा
ॐ
📜 पद्म पुराण का कथन (श्लोक)
“गावः सर्वसुखप्रदाः ।
गावः सर्वमंगलप्रदाः ।
गावः सर्वदेवमयाः प्रोक्ताः ।
गावः पवित्रं पारं स्मृतम् ॥”
📜 अर्थ:

गायें सभी सुख देने वाली, सभी मंगल प्रदान करने वाली,
सभी देवताओं का स्वरूप मानी गयी हैं और परम पवित्र हैं। — (पद्म पुराण)

1

🔥 समस्त यज्ञों के समान फल

गौ सेवा और आहुति से संपूर्ण महायज्ञों का अनंत पुण्य प्राप्त होता है।

2

🏛️ समस्त तीर्थों के समान पुण्य

गौ माता की परिक्रमा और दर्शन से समस्त पवित्र तीर्थों के स्नान का फल मिलता है।

3

🧘 पापों से मुक्ति और मन की शुद्धि

गौ स्पर्श और गोमूत्र-पंचगव्य सेवन से जन्म-जन्मान्तर के पाप नष्ट होते हैं।

4

👨‍👩‍👧‍👦 धन, धान्य, सुख, समृद्धि की प्राप्ति

जिस घर में गौ माता की सेवा होती है, वहाँ माँ लक्ष्मी एवं समृद्धि का स्थायी वास होता है।

5

⛩️ मोक्ष और परम गति की प्राप्ति

गौ दान एवं निष्काम गौ सेवा से जीव भवसागर से तरकर परम पद को प्राप्त करता है।

🛡️

जो नित्य गौ माता की सेवा करता है, उस पर स्वयं देवताओं की कृपा बनी रहती है !

ॐ
🖼️ द्वितीय चित्र प्रमाण — दिव्य शक्तियों का वास एवं ५ मुख्य अनुष्ठान महात्म्य
पद्म पुराण में (चित्र प्रमाण २)

गौ माता – सृष्टि की जननी, समृद्धि की धनी

🚩 पद्म पुराण का सार: गौ माता समस्त देवताओं का निवास स्थान व समस्त तीर्थों का मूल है !
गौमाता में ३३ कोटि देवी-देवताओं का निवास
ॐ
1

✨ दिव्य शक्तियों का वास (देवतत्त्व)

गौमाता के शरीर के प्रत्येक अंग में ब्रह्मांड की सर्वोच्च शक्तियाँ निवास करती हैं:

सींगों का मूल भाग
🔱 सींगों का मूल भाग: विष्णु और शिव का निवास
सींगों का अग्रभाग
⚡ सींगों का अग्रभाग: इंद्र का वास
मस्तक (सिर)
🪷 मस्तक (सिर): ब्रह्मा जी का निवास
ललाट (माथा)
🕉️ ललाट (माथा): साक्षात् महादेव का वास
मुख (मुख)
📜 मुख (मुख): चारों वेदों का निवास
आँखें
☀️ आँखें: सूर्य और चंद्रमा का वास
जीभ
🎶 जीभ: देवी सरस्वती का निवास
गोबर और गोमूत्र
🏺 गोबर और गोमूत्र: लक्ष्मी जी और गंगा जी का निवास
2

समस्त तीर्थों और पापों का नाश

गोधूलि: गाय के खुरों की धूल (गोधूलि) सिर पर धारण करने से समस्त तीर्थों का पुण्य मिलता है।
परिक्रमा: ब्याहंती हुई गाय की परिक्रमा से पृथ्वी की परिक्रमा जितना फल प्राप्त होता है।

3

सुख-समृद्धि और लक्ष्मी का वास

जिस घर में गौमाता की सेवा होती है, वहां कभी दरिद्रता नहीं आती। प्रतिदिन गाय को गोग्रास देने से जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं।

4

ब्राह्मण के समान पूजनीय

पद्म पुराण में उल्लेख है कि जैसे ब्राह्मण का महत्व है, वैसे ही गौमाता का भी महत्व है। दोनों की सेवा से समान आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है।

5

गौ सेवा के प्रमुख लाभ

  • 🫀 आयु, आरोग्य और बल की वृद्धि
  • 💰 धन, धान्य और वैभव की प्राप्ति
  • 🛡️ सभी प्रकार के दोष और बाधाओं का नाश
  • 🕉️ मन की शांति और मोक्ष की प्राप्ति
🛡️

गौ माता की सेवा – मानवता की सच्ची सेवा है ! | गौ रक्षा, गौ सेवा और गौ संवर्धन – यही सनातन धर्म का मूल मंत्र है !

ॐ
🖼️ तृतीय चित्र प्रमाण — पद्म पुराण सृष्टि खंड (अध्याय 48) – सर्वदेवमयी गौ माता
(सृष्टि खंड अध्याय 48)

सर्वदेवमयी गौ माता – सभी देवताओं का दिव्य स्वरूप

गौ सेवा • समस्त तीर्थ • सर्वदेवमयी स्वरूप
“सर्वदेवमयी देवी सुभद्रे भक्तवत्सले ।
सर्वपापहरे देवी गात्रं मे स्पर्शयस्व मे ॥”
(पद्म पुराण, सृष्टि खंड 48)
अर्थ:

हे भक्तों पर वात्सल्य रखने वाली, सबका कल्याण करने वाली सर्वदेवमयी गौ माता ! आप सभी देवताओं का स्वरूप हैं और समस्त पापों को हरने वाली हैं। कृपा करके मेरे शरीर को स्पर्श कर मुझे पवित्र करें।

🛡️ समस्त पापों का नाश
🏛️ समस्त तीर्थों का फल
🏺 सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति
🌾 धन-धान्य और संतान की वृद्धि
🫀 आयु, आरोग्य और बल की वृद्धि
🕉️ मन की शांति और मोक्ष की प्राप्ति
सर्वदेवमयी गौ माता (पद्म पुराण अध्याय 48)
ॐ
🌅

गोधूलि का महत्व

गाय के खुरों की धूल (गोधूलि) को सिर पर धारण करने से समस्त तीर्थों में स्नान का पुण्य और समस्त पापों का नाश होता है।

🐄

गौ परिक्रमा का फल

ब्याहती हुई गाय की एक परिक्रमा करने से पृथ्वी की परिक्रमा करने जितना पुण्य प्राप्त होता है।

🏠

गौ सेवा से सुख-समृद्धि

जिस घर में गौ माता की सेवा होती है, वहाँ कभी दरिद्रता नहीं आती, लक्ष्मी जी सदा निवास करती हैं।

🌿

गौ ग्रास का महत्व

प्रतिदिन दूसरी की गाय को एक मुट्ठी घास (गौ ग्रास) देने से जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं।

🪷

ब्राह्मण के समान पूजनीय

जैसे ब्राह्मण का सम्मान किया जाता है, वैसे ही गौ माता की सेवा और पूजा करने से समान आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है।

🖼️ चतुर्थ चित्र प्रमाण — पद्म पुराण (सृष्टि खंड अध्याय 48): गोग्रास मन्त्र व महिमा
पद्म पुराण में वर्णित

गोग्रास (गाय को भोजन देते समय) का मंत्र

📜 “गौ माता: त्रैलोक्यस्य मातरह:, सर्वदेवमयी वन्दनीया: ।”
📜 गोग्रास मन्त्र (पद्म पुराण अध्याय 48)
“सौरभेयः सर्वहिताः पवित्राः पापनाशनः ।
प्रतिगृह्णन्तु मे ग्रासं गावस्त्रैलोक्यमातरः ॥”
📜 अर्थ:

तीनों लोकों की माता, समस्त संसार का हित करने वाली, परम पवित्र और पापों का नाश करने वाली हे गौ माता !
मेरे द्वारा प्रेमपूर्वक दिए गए इस ग्रास (अन्न/घास) को आप स्वीकार करें।

गोग्रास मंत्र प्रमाण (पद्म पुराण)
ॐ
🧘

समस्त पापों का नाश

प्रतिदिन गोग्रास देने से जन्म-जन्मांतर के समस्त पातक व पाप नष्ट होते हैं।

🏺

सुख-समृद्धि और धन की प्राप्ति

जिस घर से गोग्रास निकलता है, वहाँ माँ लक्ष्मी का स्थायी वास और सुख-वैभव रहता है।

👨‍👩‍👧‍👦

आयु, आरोग्य और संतान सुख

गौ माता का आशीर्वाद परिवार में निरोगी काया, लंबी आयु एवं उत्तम संतान सुख प्रदान करता है।

🏛️

सभी तीर्थों में स्नान का पुण्य फल

गौ माता को ग्रास देने से समस्त पवित्र नदियों और तीर्थों में स्नान के समान पुण्य मिलता है।

🛡️

रोग, शोक और संकट से रक्षा

गोग्रास अर्पण से अकाल मृत्यु, भय, व्याधि तथा जीवन के समस्त संकट दूर हो जाते हैं।

🕉️

मोक्ष और परम गति की प्राप्ति

निष्कपट भाव से दिया गया गोग्रास जीव को भवसागर से तारकर मोक्ष पद की प्राप्ति कराता है।

🍲

1. प्रथम भाग अर्पण

अपने भोजन का पहला हिस्सा गाय को दें। प्रेम और श्रद्धा से खुद या किसी पवित्र पात्र में भोजन दें।

🌿

2. मंत्र उच्चारण व सेवा

गाय को प्रेम से सहलाएं और यह गोग्रास मंत्र बोलकर गोग्रास अर्पित करें। प्रतिदिन नियमित रूप से गोग्रास दें।

🙏

3. भाव व नमन

गोग्रास देने के पूर्व मन में गाय माता को प्रणाम करें। यही सनातन धर्म और संस्कृति का मूल कर्तव्य है।

🛡️

गौ सेवा ही सच्ची सेवा, गौ रक्षा ही सनातन धर्म की रक्षा ।

ॐ
🚩 पंचम चित्र प्रमाण — पद्म पुराण (सृष्टि खंड अध्याय 48): जगन्माता के रूप में गौ माता की प्रार्थना
पदम् पुराण में वर्णित (सृष्टि खंड अध्याय 48)

जगन्माता के रूप में गौ माता की प्रार्थना

🚩 “गाय के एक ग्रास से हजार यज्ञों का पुण्य मिलता है।”
📜 जगन्माता गौ माता प्रार्थना श्लोक (पद्म पुराण अध्याय 48)
“सुरभिस्त्वं जगन्मातर्देवि विष्णुपदे स्थिता ।
सर्वदेवमयी ग्रासं मया दत्तमिमं ग्रस ॥”
📜 अर्थ:

हे भगवान विष्णु के परम धाम में रहने वाली, संपूर्ण जगत की माता
सर्वदेवमयी देवी सुरभि (गौ माता) ! मेरे द्वारा अर्पित किए गए इस ग्रास को ग्रहण कीजिए।

जगन्माता के रूप में गौ माता की प्रार्थना
ॐ
🌸 गौ सेवा के महान फल (५ दिव्य फल)
🪷

समस्त पापों का नाश

गौ माता को निष्काम भाव से ग्रास अर्पित करने से जन्म-जन्मांतर के समस्त पापों का क्षय होता है।
🏛️

सभी तीर्थों में स्नान का फल

सर्वदेवमयी गौ माता को ग्रास देने से पृथ्वी के समस्त पवित्र तीर्थों के स्नान के समान पुण्य प्राप्त होता है।
🏺

सुख, समृद्धि और लक्ष्मी की प्राप्ति

विष्णुपद में रहने वाली गौ माता की कृपा से घर-परिवार में माँ लक्ष्मी का स्थायी वास एवं अक्षय समृद्धि बनी रहती है।
👨‍👩‍👧‍👦

आयु, आरोग्य और संतान की वृद्धि

गौ माता की प्रसन्नता से परिवार में उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है।
🧘

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति

सुरभि गौ माता के पूजन एवं ग्रास दान से जीवन के चारों पुरुषार्थों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सिद्धि होती है।
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गौ माता की सेवा — मानवता की सच्ची सेवा है ! | गौ रक्षा, गौ सेवा और गौ संवर्धन — यही सनातन धर्म की रक्षा है !

ॐ
🚩 षष्ठ चित्र प्रमाण — पद्म पुराण (सृष्टि खंड अध्याय 48): गौ माता के बीच निवास की प्रार्थना
पद्म पुराण में वर्णित

गौ माता के बीच निवास की प्रार्थना

✨ गौ-सामीप्य की महिमा

गौ माताएं सदैव मेरे आगे रहें, मेरे पीछे रहें, मेरे चारों ओर रहें और मैं हमेशा गौ माताओं के बीच में निवास करूं।

गौ-सामीप्य की महिमा (पद्म पुराण)
ॐ
📜 गौ-सामीप्य प्रार्थना श्लोक (पद्म पुराण अध्याय 48)
“गावो ममाग्रतो नित्यं गावः पृष्ठत एव च ।
गावो मे सर्वतःचैव गवां मध्ये वसाम्यहम् ॥”
📜 अर्थ:

गौ माताएं सदैव मेरे आगे रहें, गौ माताएं मेरे पीछे रहें, गौ माताएं मेरे चारों ओर रहें
और मैं हमेशा गौ माताओं के बीच में निवास करूं (मेरा पूरा जीवन गो-कृपा से घिरा रहे)।

🌸 गौ-सामीप्य से ५ दिव्य पुण्य फल
🏛️

सभी तीर्थों के समान पुण्य

गौ माता के सानिध्य और सामीप्य में रहने से समस्त पवित्र तीर्थों के स्नान व दर्शन का अनंत पुण्य प्राप्त होता है।
🧘

समस्त पापों का नाश

गौ माता के सानिध्य, स्पर्श और दर्शन से जन्म-जन्मांतर के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
🏺

धन, धान्य और समृद्धि की प्राप्ति

गौ-सामीप्य से घर-परिवार में माँ लक्ष्मी जी का वास होता है तथा धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
👨‍👩‍👧‍👦

सुख, शांति और कल्याण

गौ सेवा व सामीप्य से मानसिक शांति, पारिवारिक सौहार्द एवं जीवन का परम कल्याण होता है।
🕉️

आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग

गौ माता के सानिध्य में रहने से जीव में सात्त्विक गुणों का विकास होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
🛡️

गौ माता की सेवा ही सच्ची सेवा, गौ रक्षा ही सनातन धर्म की रक्षा !

ॐ
ॐ

पद्म पुराण के अनुसार गौ-सेवा का महापुण्य अर्जित करें

गौ दर्शन धाम आश्रम में गौ माता के संरक्षण, नित्य अन्नदान, चिकित्सा एवं सेवा कार्य में अपना सहयोग दें।